(Drainage System of Bihar)

महत्वपूर्ण: बिहार के जल संसाधन एवं नदी अपवाह तंत्र से संबंधित यह अध्याय बिहार की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

1. जल संसाधन : सामान्य परिचय एवं सांख्यिकी

🌍 वैश्विक एवं राष्ट्रीय परिदृश्य

  • पृथ्वी के लगभग 2/3 भाग पर जल विस्तृत है।
  • कुल जल का लगभग 97.5% खारा जल समुद्रों में पाया जाता है।
  • मात्र 2.5% से 2.7% जल शुद्ध अथवा मीठा जल है।
  • भारत के पास विश्व के कुल धरातलीय क्षेत्रफल का लगभग 2.45% भाग है।
  • विश्व के जल संसाधनों का मात्र 4% भारत में उपलब्ध है।
  • विश्व की लगभग 17.5% जनसंख्या भारत में निवास करती है।
  • देश में वार्षिक वर्षा से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है।
  • धरातलीय एवं पुनःपूर्ति योग्य भूजल की कुल उपलब्धता लगभग 1,869 BCM है।
  • इसमें से केवल 60% अर्थात लगभग 1,122 BCM जल का उपयोग संभव है।

💧 बिहार के जल संसाधन

  • बिहार एक जल-समृद्ध राज्य है।
  • बिहार की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1000–1120 मिमी है।

जल संसाधनों के दो मुख्य वर्ग

  1. धरातलीय जल संसाधन (Surface Water): नदियाँ, झीलें, तालाब, चौर, मन एवं जलाशय।
  2. भूमिगत जल संसाधन (Groundwater): वर्षा जल का भूमि में रिसाव।

बिहार में प्रतिवर्ष लगभग 790 अरब घन मीटर जल भूमि में रिसता है, जिसमें से लगभग 433 अरब घन मीटर जल मिट्टी की ऊपरी परतों एवं एक्विफर्स तक पहुँचता है।


2. बिहार का अपवाह तंत्र : सामान्य विशेषताएँ एवं वर्गीकरण

बिहार का अपवाह तंत्र मूलतः वृक्षाकार (Dendritic Drainage Pattern) है।

गंगा नदी राज्य के मध्य से पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाहित होकर बिहार को दो असमान प्राकृतिक भागों में विभाजित करती है।

बिहार का अपवाह तंत्र

उत्तरी बिहार की नदियाँ
हिमालयी तंत्र – सदानीरा

  • घाघरा (सरयू)
  • गंडक
  • बूढ़ी गंडक
  • बागमती
  • कमला-बलान
  • कोसी (सप्तकोशी)
  • महानंदा

दक्षिणी बिहार की नदियाँ
पठारी तंत्र – बरसाती

  • कर्मनाशा
  • सोन
  • पुनपुन
  • फल्गु (निरंजना)
  • किउल
  • सकरी
  • पंचाने
  • चंदन
  • अजय

3. उत्तरी एवं दक्षिणी बिहार की नदियों का तुलनात्मक विश्लेषण

आधार / लक्षण उत्तरी बिहार की नदियाँ दक्षिणी बिहार की नदियाँ
उद्गम स्थल हिमालय पर्वतमाला, तिब्बत एवं नेपाल की श्रेणियाँ छोटानागपुर का पठार एवं विंध्याचल की पहाड़ियाँ
जल की प्रकृति सदानीरा (Perennial)
वर्षभर जल प्रवाहित रहता है।
मौसमी / बरसाती
ग्रीष्मकाल में सूख जाती हैं या पतली धारा बन जाती हैं।
मार्ग परिवर्तन अत्यधिक मार्ग परिवर्तन एवं विसर्पण; गोखुर झीलों का निर्माण। अपेक्षाकृत स्थिर एवं निश्चित मार्ग।
बाढ़ एवं गाद भयंकर बाढ़ तथा कॉप, सिल्ट एवं बालू का भारी निक्षेपण। बाढ़ की तीव्रता अपेक्षाकृत कम।
नदी घाटी एवं ढाल मंद ढाल, चौड़ी एवं उथली नदी घाटियाँ। तीव्र ढाल एवं संकीर्ण घाटियाँ।

4. गंगा नदी प्रणाली : बिहार का मुख्य आधार

  • उद्गम: गंगोत्री हिमनद के गोमुख से भागीरथी के रूप में।
  • देवप्रयाग: अलकनंदा एवं भागीरथी के संगम के बाद इसका नाम गंगा पड़ता है।
  • हरिद्वार: यहाँ गंगा मैदान में प्रवेश करती है।
  • बिहार में प्रवेश: चौसा (बक्सर जिला) के निकट।
  • बिहार में कुल लंबाई: 445 किमी
  • भारत में कुल लंबाई: 2,525 किमी
  • जल ग्रहण क्षेत्र: लगभग 15,165 वर्ग किमी
  • बिहार से निकास: कटिहार के मनिहारी से आगे बढ़ते हुए पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है।
गंगा किनारे स्थित 12 जिले:
बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर एवं कटिहार।

विशेष तथ्य: पटना में गंगा की सर्वाधिक लंबाई लगभग 99 किमी है।


5. उत्तरी बिहार की प्रमुख नदियाँ

(क) घाघरा (सरयू / देवहा / गोगरा)

  • उद्गम: तिब्बत के पास मापचाचुंगो हिमनद / नेपाल के नाम्पा क्षेत्र से।
  • बिहार में प्रवेश: गोपालगंज जिले के समीप।
  • यह उत्तर प्रदेश एवं बिहार के बीच सीमा रेखा का निर्धारण करती है।
  • गंगा में संगम: छपरा (सारण) एवं रिविलगंज के निकट।
  • बिहार में लंबाई: लगभग 83 किमी
  • सहायक नदियाँ: छोटी गंडक, खोंचा, झरही, दाहा एवं सोंडी।

(ख) गंडक (नारायणी / शालिग्रामी / सप्तगंडकी)

  • उद्गम: मध्य हिमालय में नेपाल एवं तिब्बत की सीमा पर।
  • नेपाल में इसे सप्तगंडकी तथा मैदानी भाग में नारायणी कहा जाता है।
  • इसमें पाए जाने वाले गोल काले पत्थरों को शालिग्राम कहते हैं।
  • बिहार में प्रवेश: भैंसालोटन (वाल्मीकि नगर, पश्चिमी चंपारण) के समीप।
  • गंगा में संगम: पहलेजा घाट (सोनपुर / हाजीपुर) के निकट।
  • बिहार में लंबाई: 120 किमी
महत्वपूर्ण: त्रिवेणी बैराज एवं नहरों का संबंध गंडक नदी से है।

(ग) बूढ़ी गंडक (सिकराना)

  • उद्गम: पश्चिमी चंपारण में सोमेश्वर श्रेणी के पश्चिमी भाग से।
  • यह उत्तर बिहार में गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है।
  • ऊपरी भाग में इसे सिकराना कहा जाता है।
  • प्रवाह मार्ग: पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय एवं खगड़िया।
  • बिहार में लंबाई: 320 किमी
  • जल ग्रहण क्षेत्र: 9,601 वर्ग किमी
  • सहायक नदियाँ: मसान, बालोर, पंडई, सिकटा, तिलावे, धनौती एवं कोहरा।

(घ) बागमती

  • उद्गम: नेपाल में काठमांडू घाटी के उत्तर में शिवपुरी श्रेणी।
  • बिहार में प्रवेश: सीतामढ़ी जिले के निकट।
  • प्रवाह मार्ग: सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर एवं खगड़िया।
  • संगम: बदला घाट के पास कोसी नदी तंत्र में विलीन हो जाती है।
  • बिहार में लंबाई: 394 किमी
  • सहायक नदियाँ: लालबकेया, लखनदेई, चकनाहा एवं सिपरी धार।

(ङ) कमला-बलान

  • उद्गम: नेपाल की महाभारत श्रेणी।
  • बिहार में प्रवेश: मधुबनी जिले के जयनगर के समीप।
  • पिपराघाट के पास बलान नदी से मिलने के बाद इसे कमला-बलान कहा जाता है।
  • संगम: खगड़िया जिले में कोसी नदी में।
  • बिहार में लंबाई: 120 किमी

(च) कोसी (सप्तकोशी – बिहार का शोक)

⭐ बिहार की सबसे महत्वपूर्ण एवं परीक्षा उपयोगी नदियों में से एक

  • उद्गम: तिब्बत एवं नेपाल में गोसाईंथान चोटी के उत्तर में।
  • नेपाल में इसकी सात धाराएँ मिलकर सप्तकोशी बनाती हैं।
  • सात धाराएँ: इंद्रावती, सनकोशी, तामाकोशी, लिखूकोशी, दूधकोशी, अरुण एवं तामूर।
  • बिहार में प्रवेश: सुपौल जिले में भीमनगर के निकट।
  • इसे "बिहार का शोक" कहा जाता है।
  • कारण: अत्यधिक गाद जमाव एवं निरंतर मार्ग परिवर्तन।
  • पिछले 200 वर्षों में यह लगभग 150 किमी पूर्व से पश्चिम की ओर स्थानांतरित हुई है।
  • गंगा में संगम: कुर्सेला (कटिहार) के समीप।
  • बिहार में लंबाई: 260 किमी
कोसी परियोजना: 1954 में भारत-नेपाल समझौते के तहत भीमनगर में कोसी बैराज का निर्माण हुआ।

(छ) महानंदा

  • उद्गम: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में।
  • बिहार में प्रवेश: किशनगंज जिले में।
  • यह उत्तर बिहार के मैदान की सबसे पूर्वी नदी है।
  • प्रवाह: किशनगंज, पूर्णिया एवं कटिहार।
  • गंगा में संगम: कटिहार के दक्षिण-पूर्व में।
  • बिहार में लंबाई: 376 किमी
  • सहायक नदियाँ: मेची, कनकई, बालासन, नागर एवं रतुआ।

6. दक्षिणी बिहार की प्रमुख नदियाँ

(क) कर्मनाशा – अपवित्र नदी

  • उद्गम: कैमूर जिले में विंध्याचल की पहाड़ियों से।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसे अशुभ एवं अपवित्र नदी माना जाता है।
  • यह बिहार एवं उत्तर प्रदेश के मध्य पश्चिमी सीमा का निर्धारण करती है।
  • संगम: बक्सर जिले में चौसा के निकट गंगा नदी में।

(ख) सोन नदी (हिरण्यवाह / सोनभद्र)

  • उद्गम: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मैकाल पर्वत की अमरकंटक चोटी से।
  • बिहार में प्रवेश: रोहतास जिले में।
  • प्रवाह मार्ग: रोहतास, औरंगाबाद, भोजपुर, अरवल एवं पटना।
  • यह कैमूर पठार को छोटानागपुर पठार से अलग करती है।
  • गंगा में संगम: पटना के समीप मनेर में।
  • बिहार में लंबाई: 202 किमी
महत्वपूर्ण तथ्य:
  • 1874 में डेहरी में सोन बैराज बनाकर सोन नहर प्रणाली विकसित की गई।
  • इस पर प्रसिद्ध अब्दुल बारी पुल (कोइलवर पुल) एवं नेहरू सेतु निर्मित हैं।

(ग) पुनपुन (कीकट / बमागधी)

  • उद्गम: झारखंड के पलामू जिले की चौरहा पहाड़ी से।
  • बिहार में प्रवेश: औरंगाबाद जिले के नवीनगर में।
  • प्रवाह: औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद एवं पटना।
  • गंगा में संगम: पटना के निकट फतुहा में।
  • धार्मिक महत्व: पितृपक्ष में पिंडदान के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
  • सहायक नदियाँ: मोरहर, दरधा, मादर, धोवा एवं रामरेखा।

(घ) फल्गु (निरंजना / लीलाजन)

  • छोटानागपुर पठार से आने वाली निरंजना एवं मोहना धाराओं के मिलने से बोधगया के पास फल्गु नदी का निर्माण होता है।
  • गया शहर फल्गु नदी के तट पर स्थित है।
  • यहाँ विष्णुपद मंदिर स्थित है।
  • पितृपक्ष मेले में पिंडदान के कारण इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
  • फल्गु नदी पर गयाजी रबर डैम निर्मित है।
  • गया से आगे बढ़कर यह अंतःसलिला होकर ताल क्षेत्र में विलीन हो जाती है।

(ङ) किउल

  • उद्गम: झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र से।
  • बिहार में प्रवेश: जमुई जिले के सतपहाड़ी के पास।
  • संगम: लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा के निकट गंगा नदी में।
  • सहायक नदियाँ: हरोहर, अंजन एवं बड़नार।

(च) अन्य दक्षिणी नदियाँ

  • सकरी: हजारीबाग पठार से निकलती है और मार्ग बदलने के लिए विख्यात है।
  • अजय: जमुई जिले से निकलकर पश्चिम बंगाल में भागीरथी-गंगा में मिलती है।
  • चंदन: देवघर की पहाड़ियों से निकलकर बांका एवं भागलपुर में बहती है।

7. प्रमुख जलप्रपात, गर्म जलकुंड एवं झीलें

🌊 बिहार के प्रमुख जलप्रपात

  • ककोलत जलप्रपात: नवादा जिले में स्थित। ऊँचाई लगभग 47 मीटर (160 फीट)
  • धुआँ कुंड एवं मंझर कुंड: सासाराम (रोहतास) में कैमूर पहाड़ी पर स्थित।
  • दुर्गावती (खादरकोह) जलप्रपात: रोहतास / कैमूर सीमा पर दुर्गावती नदी पर स्थित।
  • तेलहर कुंड जलप्रपात: कैमूर जिले में।
  • सुखलदरी जलप्रपात: रोहतास जिले में कन्हर नदी पर।
  • जीयरकुंड प्रपात: भोजपुर / रोहतास क्षेत्र में फुलवरिया नदी पर।

♨ बिहार के गर्म जलकुंड

बिहार में भू-गर्भीय हलचलों एवं रेडियोएक्टिव खनिजों की उपस्थिति के कारण कई गंधकयुक्त औषधीय गर्म जलकुंड पाए जाते हैं।

राजगीर के जलकुंड
  • ब्रह्मकुंड: बिहार का सबसे गर्म जलकुंड। तापमान लगभग 87°C
  • सप्तधारा (सतघरवा), सूर्यकुंड, मखदूम कुंड, नानक कुंड एवं गोमुख कुंड।
मुंगेर के जलकुंड
  • लक्ष्मण कुंड: मुंगेर का सबसे गर्म जलकुंड। तापमान लगभग 62°C
  • सीताकुंड, रामेश्वर कुंड, ऋषि कुंड, भारारी कुंड एवं पंचतर कुंड।
गया: अग्निकुंड एवं सूर्यकुंड।

🏞 प्रमुख झीलें एवं आर्द्रभूमियाँ

कांवर झील

  • स्थान: मंझौल, बेगूसराय जिला।
  • बूढ़ी गंडक नदी के विसर्पण से निर्मित गोखुर झील (Oxbow Lake)
  • रामसर स्थल: वर्ष 2020 में बिहार का पहला रामसर स्थल घोषित किया गया।

कुशेश्वर स्थान झील

  • स्थान: दरभंगा जिला।
  • प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध आर्द्रभूमि।

सिमरी बख्तियारपुर झील

  • स्थान: सहरसा जिला।
  • घोड़े की नाल जैसी आकृति वाली गोखुर झीलों का समूह।

गोगाबिल झील (घोघा झील)

  • स्थान: कटिहार के मनिहारी में।
  • बिहार का पहला सामुदायिक रिजर्व घोषित।

अन्य प्रमुख झीलें

  • उदयपुर झील: पश्चिमी चंपारण।
  • मोती झील: मोतिहारी, पूर्वी चंपारण।

⭐ परीक्षा के लिए त्वरित पुनरावृत्ति

  • बिहार का अपवाह तंत्र – वृक्षाकार (Dendritic)
  • बिहार को उत्तरी एवं दक्षिणी भागों में विभाजित करने वाली नदी – गंगा
  • बिहार का शोककोसी नदी
  • उत्तर बिहार में गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी – बूढ़ी गंडक
  • उत्तर बिहार के मैदान की सबसे पूर्वी नदी – महानंदा
  • बिहार की सबसे गर्म जलकुंड – ब्रह्मकुंड, राजगीर
  • बिहार का पहला रामसर स्थल – कांवर झील
  • प्रसिद्ध पिंडदान स्थल से संबंधित नदी – फल्गु
  • गंडक नदी का अन्य नाम – नारायणी / सप्तगंडकी
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