अध्याय 45 के द्वितीय चरण (सर जॉर्ज बार्लो से लॉर्ड डलहौजी: 1805 से 1856 ई.) का संपूर्ण विश्लेषणात्मक नोट्स, जिसमें आपकी अपलोड की गई पाठ्य-सामग्री, NCERT (ओल्ड + न्यू), बिहार SCERT और स्पेक्ट्रम के ऐतिहासिक आयामों को समाहित किया गया है, नीचे प्रस्तुत है:
1. सर जॉर्ज बार्लो (1805–1807 ई.)
अहस्तक्षेप नीति का पालन: कॉर्नवालिस की आकस्मिक मृत्यु (गाजीपुर) के बाद जॉर्ज बार्लो को कार्यवाहक गवर्नर-जनरल बनाया गया। इसने मराठों और राजपूतों के प्रति तुष्टीकरण एवं अहस्तक्षेप की नीति अपनाई तथा होल्कर के साथ राजघाट की संधि (1805) की।
वेल्लोर का सिपाही विद्रोह (1806 ई.):
इसके कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1806 ई. का वेल्लोर (तमिलनाडु) सिपाही विद्रोह थी।
कारण: मद्रास के तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिक और कमांडर-इन-चीफ जॉन क्रैडॉक द्वारा सैनिकों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया, जिसमें माथे पर तिलक (जातीय चिह्न) लगाने और कानों में बालियां पहनने पर रोक लगाई गई तथा पगड़ी के स्थान पर चमड़े की पगड़ी/टोपी पहनना अनिवार्य किया गया।
यह ब्रिटिश भारत का पहला बड़ा धार्मिक-सैनिक असंतोष था, जिसमें टीपू सुल्तान के बंदी पुत्रों ने भी विद्रोहियों को समर्थन दिया।
2. लॉर्ड मिंटो प्रथम (1807–1813 ई.)
अमृतसर की ऐतिहासिक संधि (25 अप्रैल, 1809 ई.):
नेपोलियन के बढ़ते प्रभाव और उत्तर-पश्चिम सीमा की सुरक्षा को देखते हुए मिंटो ने अपने युवा दूत चार्ल्स मेटकॉफ को लाहौर दरबार भेजा।
महाराजा रणजीत सिंह और मेटकॉफ के मध्य अमृतसर की संधि (1809) संपन्न हुई, जिसके तहत सतलज नदी को दोनों राज्यों की स्थायी सीमा स्वीकार कर लिया गया।
चार्टर एक्ट (1813 ई.):
कंपनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया (केवल चाय और चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा)।
भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये खर्च करने का पहली बार वैधानिक प्रावधान किया गया।
ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की खुली छूट दी गई।
3. लॉर्ड हेस्टिंग्स / मार्क्विस ऑफ हेस्टिंग्स (1813–1823 ई.)
आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814–1816 ई.):
बुटवल और शिवराज सीमा विवाद के कारण युद्ध प्रारंभ हुआ।
जनरल डेविड आक्टरलोनी के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा को आत्मसमर्पण पर विवश किया।
सुगौली की संधि (मार्च 1816 ई.): इसके द्वारा युद्ध समाप्त हुआ। गोरखों ने कुमाऊं, गढ़वाल और तराई का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजों को सौंपा, काठमांडू में ब्रिटिश रेजिडेंट रखना स्वीकार किया और सिक्किम से अपनी सेनाएं हटा लीं। इसी संधि से शिमला, मसूरी और नैनीताल अंग्रेजों को प्राप्त हुए।
पिंडारियों का पूर्ण दमन:
पिंडारी मुख्य रूप से मराठों के अनियमित सैनिक व लुटेरे जत्थे थे। इनके प्रमुख नेताओं में वासिल मुहम्मद, चीतू एवं करीम खाँ शामिल थे।
लॉर्ड हेस्टिंग्स ने स्वयं उत्तरी कमान और थॉमस हिस्लोप ने दक्षिणी कमान संभालकर पिंडारियों का समूल नाश किया। चीतू को चीते ने मार डाला, करीम खाँ ने आत्मसमर्पण किया और वासिल मुहम्मद ने जेल में आत्महत्या कर ली।
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818 ई.) एवं मराठा परिसंघ का अंत:
हेस्टिंग्स ने मराठों की शक्ति को अंतिम रूप से समाप्त कर दिया।
1818 में पेशवा का पद समाप्त कर दिया गया और बाजीराव द्वितीय को 8 लाख रुपये की वार्षिक पेंशन देकर पूना से हटाकर कानपुर के निकट बिठूर निर्वासित कर दिया गया। मराठा साम्राज्य का ब्रिटिश शासन में पूर्ण विलय हो गया।
प्रेस एवं काश्तकारी सुधार:
1799 के कठोर प्रेस सेंसरशिप नियमों को समाप्त कर प्रेस के मार्गदर्शन हेतु उदार नियम बनाए।
1822 ई. में बंगाल में किसानों के हितों की रक्षा हेतु 'काश्तकारी अधिनियम' (Tenancy Act / बंगाल टेनेंसी एक्ट) लागू किया गया।
4. लॉर्ड एमहर्स्ट (1823–1828 ई.)
प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824–1826 ई.):
असम, मणिपुर और अराकान की सीमाओं पर बर्मी विस्तार के कारण यह युद्ध लड़ा गया।
यांडबू की संधि (फरवरी 1826 ई.): बर्मा के राजा ने 1 करोड़ रुपये का युद्ध हर्जाना दिया, असम, अराकान और तनासरीम के तटीय प्रांत अंग्रेजों को सौंपे तथा अपनी राजधानी अवा में ब्रिटिश रेजिडेंट रखना स्वीकार किया।
बैरकपुर का सैन्य विद्रोह (नवंबर 1824 ई.):
बर्मा जाने के लिए समुद्र पार करने को भारतीय सिपाहियों ने अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और जातिगत मान्यताओं के विरुद्ध माना।
47वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने आदेश मानने से इनकार कर दिया, जिसे एमहर्स्ट की सरकार ने तोपों से उड़ाकर क्रूरता से दबा दिया।
5. लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828–1835 ई.) — भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल
प्रशासनिक एवं संवैधानिक रूपांतरण:
भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल (चार्टर एक्ट 1833): 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा 'बंगाल के गवर्नर-जनरल' को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया। इस प्रकार संपूर्ण ब्रिटिश भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक बना। (कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार पूर्णतः समाप्त कर उसे शुद्ध प्रशासनिक संस्था बना दिया गया)।
जाति-रंग भेद का निषेध: 1833 के चार्टर एक्ट की धारा 87 के तहत तय हुआ कि किसी भी भारतीय को केवल धर्म, जाति, रंग या जन्म स्थान के आधार पर कंपनी की सेवा में पद पाने से वंचित नहीं किया जाएगा।
उच्च पदों पर भारतीयों की नियुक्ति: बेंटिक ने भारतीयों को उत्तरदायी पदों पर बैठाया; इसके समय भारतीयों को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च पद 'सदर अमीन' था, जिसे ₹700 प्रति माह वेतन मिलता था।
रियासतों का विलय: प्रशासनिक कुप्रबंधन का आरोप लगाकर बेंटिक ने 1831 में मैसूर तथा 1834 में कुर्ग एवं मध्य कछार का कंपनी साम्राज्य में विलय कर लिया।
सामाजिक, कानूनी एवं शैक्षणिक सुधार:
सती प्रथा का उन्मूलन (1829 ई.): समाज सुधारक राजा राममोहन राय के अथक प्रयासों से बेंटिक ने 1829 के नियम XVII (धारा 17) द्वारा विधवाओं को जीवित जलाना (सती होना) गैर-कानूनी और आपराधिक मानव-वध (Culpable Homicide) घोषित किया। (प्रारंभ में यह केवल बंगाल में लागू हुआ, 1830 में इसे मद्रास और बम्बई में लागू किया गया)।
ठगी प्रथा का अंत (1830 ई.): मध्य और उत्तर भारत में व्यापारियों और यात्रियों की रुमाल से गला घोंटकर हत्या करने वाले गुप्त ठगों के गिरोह (जो देवी काली/भवानी की पूजा करते थे) को समाप्त करने के लिए बेंटिक ने कर्नल विलियम स्लीमैन को विशेष दायित्व सौंपा। स्लीमैन ने लगभग 1,500 ठगों को पकड़कर 1830 तक इस प्रथा का समूल नाश किया।
शिशु बालिका हत्या (Infanticide) पर प्रतिबंध: कन्या भ्रूण एवं नवजात शिशु हत्या पर पूर्ण रोक लगाई।
आधुनिक शिक्षा एवं मैकाले मिनट्स (1835 ई.): आंग्ल-प्राच्य विवाद (Anglicist-Classicist Controversy) को सुलझाने हेतु लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में समिति बनी। मैकाले के प्रसिद्ध कार्यवृत्त (Macaulay's Minute - 1835) की अनुशंसा पर बेंटिक ने अंग्रेजी को उच्च शिक्षा और सरकार का आधिकारिक माध्यम स्वीकार किया।
प्रथम विधि आयोग (Law Commission): 1833 के एक्ट के तहत मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग बना, जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC) का प्रारूप तैयार किया।
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज (1835 ई.): बेंटिक ने पश्चिमी चिकित्सा पद्धति के अध्ययन हेतु भारत में प्रथम मेडिकल कॉलेज की नींव कलकत्ता में रखी।
6. सर चार्ल्स मेटकॉफ (1835–1836 ई.)
भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता (Liberator of the Indian Press): इसने अपने एक वर्ष के संक्षिप्त कार्यकाल में 1823 के कठोर 'प्रेस लाइसेंसिंग रेगुलेशन' को रद्द कर 'प्रेस एक्ट, 1835' (मेटकॉफ एक्ट) पारित किया। इसने समाचार पत्रों पर से सरकारी पूर्व-प्रतिबंध हटा दिए, जिसके कारण इसे 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' कहा जाता है।
7. लॉर्ड ऑकलैंड (1836–1842 ई.)
प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1838–1842 ई.): ऑकलैंड ने 'फॉरवर्ड पॉलिसी' (अग्रगामी नीति) अपनाई। उसने रूस के प्रभाव को रोकने के लिए काबुल के लोकप्रिय अमीर दोस्त मोहम्मद खाँ को हटाकर ब्रिटिश समर्थक शाह शुजा को गद्दी पर बैठाने का असफल सैन्य प्रयास किया। यह युद्ध अंग्रेजों के लिए एक रणनीतिक आपदा साबित हुआ, जिसमें ब्रिटिश सेना को भारी जन-धन की क्षति झेलकर भागना पड़ा।
ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) का जीर्णोद्धार (1839 ई.): शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित 'सड़क-ए-आजम' का कलकत्ता से दिल्ली तक पक्का पुनर्निर्माण करवाया और इसे पहली बार 'ग्रैंड ट्रंक रोड' नाम दिया।
धार्मिक सुधार: तीर्थयात्रा कर (Pilgrim Tax) समाप्त किया और हिंदू धार्मिक न्यासों के प्रबंधन से सरकारी नियंत्रण हटाया।
चिकित्सा शिक्षा: ब्रिटिश संसद ने भारतीय छात्रों को आधुनिक डॉक्टरी की शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश (लंदन) जाने की आधिकारिक अनुमति प्रदान की।
8. लॉर्ड एलेनबरो (1842–1844 ई.)
प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध की समाप्ति: ब्रिटिश कैदियों को रिहा कराकर ब्रिटिश सेनाएं काबुल से वापस लौटीं।
सिंध का पूर्ण विलय (अगस्त 1843 ई.):
अफगान युद्ध में हुए अपमान को धोने के लिए अंग्रेजों ने सिंध के निर्दोष अमीरों पर विश्वासघात का झूठा आरोप लगाया।
सर चार्ल्स नेपियर के सैन्य नेतृत्व में 1843 में सिंध को जीतकर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया।
नेपियर का प्रसिद्ध कथन: नेपियर ने अपनी डायरी में लिखा था कि "हमें सिंध पर अधिकार करने का कोई हक नहीं है, फिर भी हम ऐसा करेंगे, और यह एक लाभदायक, उपयोगी और मानवीय बदमाशी होगी।" बाद में उसने टिप्पणी की कि "सिंध विजय अफगानी तूफान की पूंछ थी"।
दास प्रथा का पूर्ण उन्मूलन (Act V of 1843): 1833 के चार्टर एक्ट के निर्देशों के तहत 1843 के अधिनियम-5 (Act-V) द्वारा भारत में दासता को अवैध घोषित कर दिया गया तथा दासों पर स्वामियों के सभी कानूनी दावों को अदालतों द्वारा अमान्य कर दिया गया।
रविवार के अवकाश की शुरुआत: 1843 ई. से भारत में रविवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित किया गया।
9. लॉर्ड हार्डिंग प्रथम (1844–1848 ई.)
प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845–1846 ई.): इसके काल की सबसे प्रमुख घटना थी; युद्ध में अंग्रेज विजयी हुए और 9 मार्च 1846 को ऐतिहासिक लाहौर की संधि तथा 22 दिसंबर 1846 को भैरोंवाल की संधि संपन्न हुई।
नरबलि प्रथा का दमन: मध्य भारत और उड़ीसा की खोंड जनजाति में प्रचलित मानव बलि प्रथा ('मरियाह प्रथा') पर प्रतिबंध लगाया। इसके दमन हेतु कैंपबेल को विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया था।
शिक्षा को रोजगार से जोड़ना: इसने घोषणा की कि सरकारी नौकरियों में अंग्रेजी भाषा के जानकारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
10. लॉर्ड डलहौजी (1848–1856 ई.) — साम्राज्यवादी विस्तार एवं आधुनिक भारत की नींव
साम्राज्य विस्तार एवं युद्ध:
द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848–1849 ई.): मुल्तान के दीवान मूलराज और शेर सिंह के विद्रोह के बाद डलहौजी ने युद्ध छेड़ा। रामनगर (1848), चिलियानवाला (जनवरी 1849) और गुजरात (फरवरी/मार्च 1849) की लड़ाइयों में सिखों की पराजय के बाद 29 मार्च 1849 को संपूर्ण पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया तथा कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरिया को भेज दिया गया।
द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1852 ई.): ब्रिटिश व्यापारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाकर डलहौजी ने हमला किया और 1852 में लोअर बर्मा एवं पीगू (रंगून सहित) को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।
सिक्किम का विलय (1850 ई.): सिक्किम के राजा पर दो अंग्रेज डॉक्टरों (डॉ. कैंपबेल और डॉ. हुकर) के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर डलहौजी ने 1850 में सिक्किम के दार्जिलिंग और तराई क्षेत्रों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया।
इनाम कमीशन (1852 ई.): बम्बई में कर-मुक्त (लाखिराज) जागीरों की जांच के लिए गठित हुआ; इसके तहत लगभग 20,000 जागीरें जब्त कर ली गईं, जिसने 1857 के विद्रोह की जमीन तैयार की।
सैन्य मुख्यालयों का स्थानांतरण: तोपखाने के मुख्य शस्त्रागार को कलकत्ता से मेरठ स्थानांतरित किया गया तथा थल सेना का मुख्य कमान मुख्यालय शिमला में स्थापित किया गया (शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी भी बनाया गया)।
व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse / हड़प नीति)
डलहौजी का मानना था कि देशी रियासतों को पराधीन बनाकर ब्रिटिश शासन के अधीन लाना भारत के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक है। इसके तहत जिन देशी शासकों के पास स्वयं का वैध पुत्र (वारिस) नहीं होता था, उन्हें गोद लिए गए पुत्र (दत्तक पुत्र) को राज्य की राजनीतिक गद्दी सौंपने की अनुमति नहीं थी (निजी संपत्ति में गोद लेने की छूट थी)।
हड़प नीति के तहत विलय किए गए राज्यों का सही कालक्रम (अत्यंत महत्वपूर्ण):
अवध का विलय (1856 ई. - कुशासन के आधार पर):
अवध के पास उत्तराधिकारी का अभाव नहीं था; अतः डलहौजी ने उस पर व्यपगत सिद्धांत लागू नहीं किया।
डलहौजी ने रेजिडेंट जेम्स आउट्रम की रिपोर्ट (1855) के आधार पर अवध पर 'आंतरिक कुशासन और अराजकता' (Misgovernance) का आरोप लगाया और फरवरी 1856 में अवध को हड़प लिया।
उस समय अवध का अंतिम नवाब वाजिद अली शाह था, जिसे निर्वासित कर कलकत्ता के मटियाबुर्ज भेज दिया गया। (अवध के संस्थापक 18वीं सदी में सआदत खाँ 'बुरहान-उल-मुल्क' थे)।
आधुनिक बुनियादी ढांचे एवं प्रशासनिक सुधार
भारत में रेलवे का जनक (Father of Indian Railways):
भारत में पहली व्यावसायिक रेल लाइन 16 अप्रैल, 1853 ई. को ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) द्वारा बम्बई से ठाणे के बीच (34 किमी) चलाई गई। (इंजन के नाम: सुल्तान, सिंध और साहिब)।
1854 में पूर्वी भारत में कलकत्ता (हावड़ा) से रानीगंज कोयला क्षेत्र के बीच दूसरी रेल लाइन बिछाई गई।
इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ (तार सेवा): 1853 ई. में भारत में पहली बार बिजली से संचालित टेलीग्राफ लाइन कलकत्ता से आगरा के बीच (800 मील) प्रारंभ की गई, जिसका श्रेय ओ'शॉघनेसी (O'Shaughnessy) को जाता है।
डाक सुधार (Post Office Act, 1854): 1854 में नया पोस्ट ऑफिस एक्ट पारित हुआ। भारत में पहली बार एक समान डाक दर (आधा आना) और आधुनिक डाक टिकटों का प्रचलन शुरू हुआ।
लोक निर्माण विभाग (PWD): सैन्य बोर्ड से निर्माण कार्यों का दायित्व छीनकर 1854 ई. में पहली बार एक पृथक और असैनिक सार्वजनिक निर्माण विभाग (Public Works Department - PWD) तथा स्वतंत्र लोक सेवा विभाग की स्थापना की। गंगा नहर (1854) और जीटी रोड के विस्तार का कार्य इसी के अधीन पूरा हुआ।
शिक्षा का मैग्नाकार्टा — वुड का डिस्पैच (Wood's Despatch, 1854):
चार्ल्स वुड की अध्यक्षता वाले बोर्ड ऑफ कंट्रोल द्वारा प्रेषित व्यापक शिक्षा नीति लागू की गई।
प्रावधान: प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा (वर्नाक्यूलर), माध्यमिक स्तर पर एंग्लो-वर्नाक्यूलर स्कूल, उच्च स्तर पर कॉलेजों की स्थापना, और प्रत्येक प्रांत में एक पृथक 'शिक्षा निदेशक' (Director of Public Instruction - DPI) की नियुक्ति।
लंदन विश्वविद्यालय की तर्ज पर 1857 में तीन प्रेसीडेंसी नगरों—कलकत्ता, बम्बई और मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सिविल सेवा में खुली प्रतियोगी परीक्षा (Charter Act, 1853):
1853 के चार्टर एक्ट द्वारा कंपनी के डायरेक्टर्स का संरक्षण और नामजदगी (Patronage) का अधिकार समाप्त कर दिया गया।
असैनिक अधिकारियों की नियुक्ति हेतु खुली प्रतियोगी परीक्षा अनिवार्य की गई, जिसके लिए आयु सीमा 18 से 23 वर्ष तय की गई। (मैकाले समिति, 1854 की सिफारिश पर लंदन में परीक्षा शुरू हुई)।
नोट: सत्येंद्रनाथ टैगोर 1863 ई. में लंदन में सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले प्रथम भारतीय बने।
1922 ई. से यह परीक्षा लंदन के साथ-साथ भारत में पहली बार इलाहाबाद में भी आयोजित की जाने लगी।
विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856): ईश्वरचंद्र विद्यासागर के सामाजिक आंदोलन के फलस्वरूप डलहौजी के कार्यकाल में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' का प्रारूप तैयार हुआ, जिसे जुलाई 1856 में लॉर्ड कैनिंग के समय कानूनी रूप से पारित किया गया।
⚡ One-Liner Facts
जॉर्ज बार्लो → वेल्लोर सिपाही विद्रोह (1806)
मिंटो प्रथम → अमृतसर की संधि (1809)
लॉर्ड हेस्टिंग्स → पिंडारी दमन एवं मराठा परिसंघ का अंत
विलियम बेंटिक → सती उन्मूलन एवं ठगी दमन
चार्ल्स मेटकॉफ → भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता
डलहौजी → हड़प नीति, रेलवे, टेलीग्राफ, डाक एवं PWD
📌 Quick Facts — परीक्षा से पहले एक नजर
1806 — वेल्लोर सिपाही विद्रोह
1809 — अमृतसर की संधि
1816 — सुगौली की संधि
1829 — सती प्रथा उन्मूलन
1835 — मेटकॉफ एक्ट एवं आधुनिक शिक्षा का दौर
1843 — सिंध का विलय
1849 — पंजाब का विलय
1853 — पहली व्यावसायिक रेल एवं टेलीग्राफ
1854 — डाक सुधार, PWD एवं वुड का डिस्पैच
1856 — अवध का विलय
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